चर्चाओं मे उत्तराखंड सचिवालय के सेक्शन अफसर के स्थानांतरण और नियुक्ति


कुलदीप सिंह राणा, देहरादून:

राज्य सचिवालय के कर्मचारी इन दिनों आपस में चर्चा करते हुये यह समझने की कोशिश कर रहे है कि आखिर विगत माह 19 जून को हरिद्वार मेडिकल कालेज के पीपीपी मोड़ संबंधी प्रकरण पर मुख्यसचिव के साथ बैठक में ऐसा क्या हुआ कि छुटते ही सचिव साहब,अनुभाग 5 के अधिकारियों पर बरस पड़े और शाम होने तक एस रंजन क्वीरा व आरओ मगन राणा को अनुभाग से हटाने निर्णय कर लिया और साथ ही साथ पड़ोस के अनुभाग 6 के एसओ विजेंद्र सिंह अनुभाग 5 की जिम्मेदारी सँभालने का निर्देश दे डाला, फिर शनिवार व रविवार कि छुट्टी बाद आश्चर्यजनक तरिके से उक्त दोनों हटाये गये अधिकारियों की अनुभाग में दोबारा एंट्री भी हो गयी। हालांकि बाद में सचिव के व्यवहार से खिन्न उक्त अधिकारियों ने सचिवालय प्रशासन विभाग में अपना विभाग बदल देने का निवेदन कर डाला। जिसके बाद बुधवार 9 जुलाई को रंजन क्वीरा को जलागम में और उनके स्थान पर अनुभाग 5 में राजेंद्र तिवारी को नियुक्ति दे दी गयी,साथ ही मगन राणा को क़ृषि अनुभाग का प्रभार सौंप दिया गया। कहानी यहीं खत्म नहीं होती है पाठकों, कहा जा रहा है कि इन बदली हुई परिस्थिति में अनुभाग 6 के एसओ विजेंद्र सिंह फिर सक्रिय हुये और सचिव से अपनी करीबी का लाभ उठाते हुये अनुभाग 5 से राजेंद्र तिवारी को हटा अपने पक्ष में आदेश करवा लाते है, राजेंद्र तिवारी को उनके स्थान पर अनुभाग 6 में भेज दिया जाता है। देखने सुनने में तो यह स्थानांतरण की एक सामान्य प्रक्रिया सी लगती हैं लेकिन इसका एक दूसरा पहलू खासा चर्चा बटोर रहा है। उसे समझने के लिये आपको पहले यह समझना होगा कि यह अनुभाग 5 और 6 क्या है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासन में अनुभाग 5 में चिकित्सा शिक्षा से सम्बंधित कार्य जिनमे मेडिकल कालेज निर्माण, संचालन,बजट व प्रोफ़ेसर्स की नियुक्ति और अनुभाग 06 में नर्सिंग शिक्षा व कालेज से सबंधित कार्य आते है। 06 की तुलना में अनुभाग 5 का बजट भी काफी भारी भरकम रहता है। जो अनुभाग 5 की कुर्सी का मुख्य आकर्षण भी हैं और पूरी चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु भी।
विभाग में विजेंद्र सिंह को सचिव डॉ राजेश कुमार का करीबी माना जाता है कहा जा रहा है कि लम्बे समय से उनकी नजर चिकित्सा शिक्षा अनुभाग 5 के एसओ की कुर्सी पर थी,लेकिन तमाम जतन करने के बाद भी वह कामयाब नहीं हो पा रहे थे। इधर अनुभाग 6 में प्राइवेट नर्सिंग व पैरमेडिकल संस्थानों से जुड़े अनेक प्रकरण भी सुर्खिया बटोर रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम में निजि संस्थान से जुडे एक व्यक्ति जिसका शासन और सत्ता के गालियारों में काफी दखल रहता हैं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है कहा जा रहा हैं कि उसने अपने रसूख के दम पर उसने इस प्रकरण को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की थी सचिव से उनका एक आदेश कैंसिल तक करवा लिया था। इस व्यक्ति के बारे में यह भी कहा जा रहा है प्रदेश में नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विभाग तो इसके इशारों पर ही काम करता हैं
खैर नियुक्ति के इस खेल में एसओ विजेंद्र सिंह विजेता रहें। जब इन चर्चाओं को लेकर उनका पक्ष जाना तो उन्होंने कहा कि “वह सरकारी नौकर है और शासन के आदेशों का पालन कर रहे हैं।”दूसरी तरफ रंजन क्वीरा और मगन राणा इस विषय पर मौन धारण किया हुआ है।

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