कुलदीप सिंह राणा/देहरादून /09-06-2026
अव्यवस्थाओं के कारण विख्यात हो चुका उत्तराखंड की राजधानी में स्थित राजकीय दून मेडिकल कालेज में कुछ डॉक्टर्स वर्षों से कुंडली जमाये बैठे हुये है।
प्रदेश में वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 लागू है जिसके अंतर्गत सभी विभागों में वार्षिक स्थातरण हेतु 10 जून की तिथि निर्धारित है।
लगता है दून मेडिकल कालेज के इन डॉक्टर्स पर न तो ट्रांसफर एक्ट 2017 लागू होता है और न ही प्रमोशन के उपरांत ट्रांसफर की नीति।
ऐसा नहीं कि चिकित्सा शिक्षा विभाग पहले कभी ट्रांसफर नहीं हुये हो। वर्ष 2018,1920,और 2025 के दौरान विभाग में अनेक डॉक्टर्स के ट्रांसफर हुये, जिन्हे दून मेडिकल कालेज से ट्रांसफर कर श्रीनगर, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और हरिद्वार स्थित मेडिकल कालेज भेज दिया गया,लेकिन कुछ डॉक्टर्स ऐसे भी हैं जिन्हे कोई देहरादून से हिला तक नहीं सका।

विवेचना करने पर पता चला कि वर्षों से दून मेडिकल कालेज में ही जमे हुये यह तमाम डॉक्टर्स चिकित्सा शिक्षा के पूर्व निदेशक रहे डॉ आशुतोष सयाना के खासम-खास में शामिल थे,जिन्हे उन्होंने विभिन्न दायित्वों से भी नवाज रखा था।असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति से लेकर प्रोफेसर पद पर प्रमोशन होने के बावजूद भी कोई इन्हे दून मेडिकल कालेज से बाहर नहीं भेज सका है।
इनमे से कुछ डॉक्टर्स तो ऐसे भी है जो वर्ष 2016-17 में कांट्रेक्ट के तहत मेडिकल कालेज में नियुक्त हुये थे, वर्ष 2018 में हुई अस्सिटेंट प्रोफेसर की सीधी भर्ती के बाद यह दून में ही नियुक्त हो गये।
एक वर्ष बाद जब वर्ष 2019 में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हुई सीधी भर्ती आई तो एक वर्ष पूर्व ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के बावजूद एसोसिएट प्रोफेसर की सीधी भर्ती में भी इनके द्वारा अप्लाई किया गया।
वर्ष 2020 में लगभग डेढ़ वर्ष अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर रहने के बाद सीधी भर्ती से यह डॉक्टर्स देहरादून में ही एसोसिएट प्रोफेसर बन फिर से नियुक्ति पा गये।
वर्ष 2024 में भी डॉ सयाना के निदेशक रहते हुये ही इन डॉक्टर्स को प्रोफेसर के पद पर प्रमोट भी कर दिये गया।
उत्तराखंड के ट्रांसफर एक्ट 2017 में पदोन्नति के बाद स्थानांतरण को लेकर अलग अलग व्यवस्थायें है। किन्तु प्रमोशन के बाद होने वाले ट्रांसफर में भी मजाल है कि इन चहेतों को देहरादून से बाहर दुर्गम में स्थित किसी मेडिकल कालेज में ट्रांसफर होने दिया गया हो, यहाँ तक कि इन्हे हरिद्वार भी नहीं भेजा गया।
मार्च माह में हुये मंत्रीमण्डल विस्तार के बाद अब विभाग में कर्मचारियों का कहना हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सभाल रहें मंत्री बदल दिये, पाँच महीने में दो सचिवों के ट्रांसफर कर दिये, खुद डॉ सयाना तो निदेशक की अपनी कुर्सी बचा नहीं पाये, प्रिंसपल बनाकर उन्हें पहले ही श्रीनगर मेडिकल कालेज भेज दिया गया था , तो ट्रांसफर सत्र में अब सबकी नजर दून मेडिकल कालेज के इन डॉक्टर्स पर हैं जो वर्षों से देहरादून में कुंडली जमाये बैठे हैं। लोग कहने लगे है क्या यह डॉक्टर्स भी कभी पहाड़ का मुँह देखेंगे।
वहीं कुछ डॉक्टर्स ऐसे भी है जों 8 वर्ष दुर्गम में सेवायें देने के बाद नियमानुसार ट्रांसफर होकर देहरादून आये थे। लेकिन नियमों का हवाला देते हुये उन्हें भी दून से बाहर ट्रांसफर भी कर दिया गया, जबकि इनमें से कुछ को तो दून मेडिकल कालेज में ज्यादा वर्ष भी नहीं हुये थे।
ऐसा नहीं है कि निदेशक रहते हुये डॉ सयाना के कार्यकाल में डॉक्टर्स के ट्रांसफर नहीं हुये हो। सूची लम्बी है। डॉ अनंत नारायण सिन्हा, डॉ चंद्रशेखर, डॉ रीना पाल,डॉ संजय गौड़,डॉ मोहित गोयल,डॉ भावना पंत, डॉ महेन्द्र पंत आदि अनेक ऐसे डॉक्टर के नाम है जिनका ट्रांसफर हुये है।
सोतेलेपन के शिकार हुये अनेक डॉक्टर्स ने प्रमोशन के उपरांत नीतिगत ट्रांसफर न होने पर नाराजगी भी व्यक्त की थी लेकिन डॉ सायना के साये में खडे इन डॉक्टर्स पर कोई नजर कैसे डाल सकता था।
अब बदले हुये हालातों में यह डॉक्टर्स सुदूर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में बने मेडिकल कालेज में ट्रांसफर से बचने की जुगत में लगे हुये है कुछ तो तिलक मार्ग पर संघम शरणम गच्छामि करते हुये भी देखे जा रहें है।
