Kuldeep Singh Rana /Dehradun /18-7-2026
उत्तराखंड के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान, श्रीनगर से संबद्ध हेमवती नंदन बहुगुणा (एच.एन.बी.) बेस टीचिंग चिकित्सालय को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच ) का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। गुणवत्ता परिषद भारत (क्वालिटी कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया ) की संस्था एनएबीएच ने ई-मेल के माध्यम से अस्पताल को प्रमाणन की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह उत्तराखंड का पहला राजकीय चिकित्सालय बन गया है जिसे यह प्रतिष्ठित गुणवत्ता प्रमाणन हासिल हुआ है।

चिकित्सा के क्षेत्र में यह राष्ट्रीय स्तर प्रमाण माना जाता है एनएबीएच प्रमाणन
एनएबीएच प्रमाणन किसी भी अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण, आपातकालीन सेवाओं, दवा प्रबंधन, चिकित्सा अभिलेखों के रखरखाव और अस्पताल प्रशासन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के आधार पर प्रदान किया जाता है यह उपलब्धि दर्शाती है कि अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं के निर्धारित गुणवत्ता मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।चिकित्सा के क्षेत्र में यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण माना जाता है।
एनएबीएच प्रमाणन–रेफरल सेंटर की धाराणा से निकालने में कामयाब रहे डॉ आशुतोष सयाना
एक समय ऐसा था जब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच यह धारणा प्रचलित थी कि श्रीनगर स्थित एच.एन.बी. बेस टीचिंग चिकित्सालय में बड़ी संख्या में मरीजों को उच्च उपचार के लिए अन्य संस्थानों में रेफर किया जाता है। इसी कारण आलोचक इसे व्यंग्य में “रेफरल सेंटर” तक कहने लगे थे। इस उपलब्धि से न केवल गढ़वाल मंडल बल्कि पूरे उत्तराखंड के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही मेडिकल छात्रों और शोधार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक एवं क्लीनिकल वातावरण उपलब्ध होगा।
प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए बना प्रेरणास्रोत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एच.एन.बी. बेस टीचिंग चिकित्सालय की यह सफलता राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। यदि अन्य संस्थान भी इसी दिशा में प्रयास करें तो उत्तराखंड की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना सकती हैं।
170 गुणवत्ता मानकों की कसौटी पर कसा गया चिकित्सालय
प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना के मार्गदर्शन और डॉ. गौरी बिष्ट के नेतृत्व में करीब नौ माह तक अस्पताल को एनएबीएच के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया गया। इसके बाद मुंबई और दिल्ली से आए विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम ने अस्पताल का तीन दिनों तक गहन निरीक्षण कर 170 गुणवत्ता मानकों पर मूल्यांकन किया। प्रारंभिक निरीक्षण में बताई गई कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया गया, जिसके बाद अस्पताल को प्रमाणन प्रदान किया गया।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की एनएबीएच समन्वयक डॉ. गौरी बिष्ट ने बताया कि अस्पताल को ई-मेल के माध्यम से एंट्री लेवल हॉस्पिटल प्रमाणन की स्वीकृति मिल चुकी है।

प्राचार्य डॉ आशुतोष सयाना के कुशल नेतृत्व का परिणाम है एनएबीएच प्रमाणन
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के एच.एन.बी. बेस टीचिंग चिकित्सालय को उत्तराखंड का पहला एन.ए.ब.एच. प्रमाणित राजकीय अस्पताल बनाने की उपलब्धि ने एक बार फिर प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना की कार्यशैली को चर्चा में ला दिया है।
चिकित्सा शिक्षा को बेहद करीब से देखने वाले पत्रकारों का कहना है कि राजनितिक द्वेष और चिकित्सा शिक्षा में बैठे षड्यंत्रकारियों की मिलीभगत का शिकार हुये डॉ सयाना को वर्ष 2025 में प्रभारी निदेशक चिकित्सा शिक्षा व प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज के पद से हटा कर श्रीनगर भेजा गया था। चार्ज लेने के बाद से ही डॉ. सयाना ने संस्थान की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव लाने हेतु अस्पताल की व्यवस्थाओं, चिकित्सा सेवाओं में गुणवत्ता, रोगीयों की स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के प्रयास शुरू किये। यह डॉ सयाना के प्रयासों के परिणामस्वरूप अस्पताल को एनएबीएच प्रमाणन प्राप्त हुआ और यह उत्तराखंड का पहला एनएबीएच प्रमाणित राजकीय चिकित्सालय बन गया।

एचएनबी बेस चिकित्सालय श्रीनगर को एनएबीएच प्रमाणन मिलना पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। इससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। यह सफलता अस्पताल के सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और मेडिकल कॉलेज की पूरी टीम की मेहनत का परिणाम है।
सुबोध उनियाल, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार
एनएबीएच समन्वयक डॉ. गौरी बिष्ट ने बताया कि अस्पताल को ई-मेल के माध्यम से एंट्री लेवल हॉस्पिटल प्रमाणन की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश रावत तथा अस्पताल के सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को बधाई दी।
