कुलदीप सिंह राणा /देहरादून /22-05-2026
उत्तराखंड में जंगल धधक रहे हैं।मौसम की बेरुखी इंसानों के साथ साथ वन एवं वन्यजीवों के लिये भी समस्या खड़ी कर रही है लगातार धूप तेज हो रही है।बढ़ते तापमान ने हवाओं को गर्म कर दिया है जंगलों में नमी सूख चुकी है। जिससे पर्वतीय क्षेत्रों के जंगल सुलगने शुरू हो गये है
क्लाइमेट चेंज का असर अब उत्तराखंड में भी स्पस्ट महसूस किया जाने लगा है। बदली हुई परिस्थितियों ने इस मध्य हिमालयी राज्य का प्राकृतिक संतुलन भी बिगाड़ दिया है।सूखी चुकी जंगल की वनस्पतियाँ लगातार बढ़ते तापमान से तीव्र ज्वलंशील हो गयीं है।
प्रदेश के वन विभाग द्वारा जो आंकड़े जारी किये गये है उसके अनुसार 15 फरवरी 2026 से मई,20 तक राज्य के विभिन्न वन डिवीजनों में फारेस्ट फायर की 309 बनाने की घटनाएं रिपोर्ट की गयीं है,जिसमे अब तक कुल 257 हेक्टेयर से अधिक का वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है।

प्रदेश में फारेस्ट फायर की सर्वाधिक घटनाएं गढ़वाल मंडल में रिपोर्ट की गयीं हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी की जंगल लगातार आग की चपेट में आने से सुलग रहें हैं। कुमायूं मंडल में पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा का वन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा हैं।
गढ़वाल मंडल में फारेस्ट फायर की कुल 227 घटनाएं दर्ज हुई है। कुमायूं मंडल में 50 मामले सामने आये है जबकि फारेस्ट फायर की 32 घटनाएं वाइल्ड लाइफ रेंज में दर्ज हुई है।
पश्चिमी पिंडर रेंज और बद्रीनाथ वन प्रभाग के जंगलों में फारेस्ट फायर की जद में आने से लगभग 3.5 हेक्टेयर पौधारोपण क्षेत्र भी प्रभावित हो चुका है। हजारों छोटे पौधे जलकर राख़ हो गये है।

रात्रि के समय पहाड़ों पर फैली आग की ऊँची ऊँची लपटे दूर-दूर तक स्पस्ट दिखायी दे रही हैं। जंगल जलने से उत्पन्न धुयें के गुबार ने आस पास के बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले रखा हैं। स्थानीय निवासियों को सांस लेने में दिक्क़तों का सामना करना पड रहा हैं।मौसम की मार के ऊपर से जंगलों की आग से उत्पन्न वातावरण की गर्मी और धुएँ ने समीपवर्ती गाँवो के निवासियों का जीवन बेहद अस्त व्यस्त कर दिया है। जंगलों में फैली आग अब रिहाईसी इलाकों तक पहुंचने लगी है जिससे स्थानीय लोगों को जीवन के लिये संघर्ष करना पड रहा है।
मुख्य वन संरक्षक और आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी सुशांत पटनायक का कहना है कि…..
वन विभाग की टीम लगातार जंगलों में लगी आग को नियंत्रित करने में जुटी हुई है। सबसे ज्यादा ध्यान उन इलाकों पर दिया जा रहा है जहां फारेस्ट फायर आबादी के करीब पहुंच रही है ।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गढ़वाल मंडल के कई डिवीजन में फारेस्ट फायर तेजी से फैल रही है। दुर्गम पहाड़ी इलाको में मार्गों के आभाव के कारण वन फायर टीम को मौके तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है कई स्थानों पर कर्मचारी घंटो पैदल चलकर जंगल के प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच रहे है।
गर्मी का मौसम आते ही पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में आग लगना कोई नई बात नहीं हैं। समस्या यह है कि कम होने के बजाय साल दर साल इसका दायरा बढ़ता ही जा रहा है। राज्य में वन क्षेत्र के अंतर्गत बड़े हिस्से में चीड़ (पाइन ट्री) के जंगल का विस्तार है। चीड़ के पेड़ों से निकलने वाला लीसा और सूखी पत्तियां अत्याधिक ज्वलन शील होने के कारण चिंगारी पड़ते ही बारूद की तरह सुलग उठती है।
फारेस्ट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी किया हुआ है। 1438 फायर स्टेशन एक्टिव मोड़ में है। 5600 फॉरेस्ट फायर वालंटियर्स को आग बुझाने के काम में लगाया गया हैं राज्य में लगभग 40 मास्टर फायर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं जहां से लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रदेश का वन विभाग का दावा कर रहा है कि वनाग्नि की हर सूचना पर तुरंत टीमों को रवाना किया जा रहा है।
