ट्रांसफर इंडस्ट्री के बयान से किस पर निशाना साध गये सुबोध उनियाल ?

कुलदीप सिंह राणा/देहरादून /18-05-2026


उत्तराखंड के नये नवेले स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि उनके इस विभाग में अब ‘ट्रांसफर इंडस्ट्री’ नहीं चलेगी। दरअसल मंत्री जी नर्सेज डे के अवसर पर दून मेडिकल कालेज में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहें थे, जहाँ अपने सम्बोधन के दौरान ही उन्होंने यह बात कही।


सुबोध उनियाल के उक्त सम्बोधन से अपनी ही सरकार के पूर्व मंत्रियों के कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गये है।
सवाल उठता है कि क्या प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने अपने कार्यकाल में विभाग को “ट्रांसफर इंडस्ट्री” बना डाला है ?


क्योंकि उत्तराखंड में वर्ष 2017 से भारतीय जनता पार्टी कि प्रचण्ड बहुमत वाली डबल इंजन सरकार है। इस दौरान वर्ष 2017 से 2021 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेद्र रावत सूबे के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाले हुये थे।


नेतृत्व परिवर्तन के बाद यह विभाग डॉ धन सिंह रावत के जिम्मे आ गया और वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक उनके पास रहा है।


विगत माह प्रदेश में हुये मंत्री मंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा यह विभाग डॉ धन सिंह से हटा कर सुबोध उनियाल को दे दिया गया।


अब सवाल उठता है कि विगत एक माह में ही सुबोध ने विभागों में ऐसा क्या देख समझ लिया है जो उन्होंने ‘ट्रांसफर इंडस्ट्री’ इतना गंभीर बयान दे डाला।


आखिर सुबोध अपने इस बयान से किस पर निशाना साध रहे है?

यह बात आम है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहें डॉ धन सिंह रावत और मुख्य्मंत्री पुष्कर धामी के बीच शुरुवात से ही राजनितिक प्रतिद्वंदिता रही है और सरकार में मंत्री होते हुये भी सुबोध किस गुट में शामिल है यह बात भी किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में चर्चायें है कि उक्त बयान बिना सोचे समझें तो नहीं दिया गया होगा।


तो क्या अपने आका को खुश करने के लिये सुबोध ने यह शब्द बाण छोड़ा है?


उल्लेखनीय है कि चुनाव को लेकर डॉ धन सिंह रावत बीते पाँच माह से पश्चिम बंगाल भाजपा संगठन में अपनी सेवाएं दें रहे थे उसी दौरान प्रदेश में हुये मंत्रिमंडल विस्तार में यह विभाग उनसे हटा कर सुबोध उनियाल को दे दिया। जिसके बाद सत्ता के करीबी पत्रकारों ने यह प्रचारित करना शुरुआत कर दिया था कि यह बदलाव सहमति से किया गया है।अगर सब सहमति से हुआ है तो फिर सुबोध का इस प्रकार का बयान क्यों सामने आया है।

हालांकि सुबोध उनियाल से भी तकनिकी शिक्षा विभाग हटाकर डॉ धन सिंह को भी दिया गया है लेकिन डॉ धन सिंह कि तरफ से अभी तक तकिनीकी शिक्षा कोई टिप्पणी नहीं की गयीं है।


राजनीति में नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचो पर दिये गये बयानों के बड़े मायने होते है बात तब और भी गंभीर हो जाती है जब कोई बयान सत्ता में बैठे जिम्मेदार मंत्री द्वारा दिया गया हो जिसमे अपनी ही पार्टी के प्रमुख नेता टारगेट होते नजर आ रहें हो।

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