डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट-जो पद अस्तित्व में ही नहीं उससे त्यागपत्र कैसा?

दून मेडिकल कालेज के डिप्टी एमएस डॉ नंदन बिष्ट का त्यागपत्र


कुलदीप सिंह राणा /देहरादून /15-06-2026


बीते दिनों से सोशल मीडिया में राजकीय दून मेडिकल कालेज हॉस्पिटल से जुडी एक खबर तेजी से वाइरल हो रही है। कहा जा रहा हैं कि अस्पताल के डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ नंदन सिंह बिष्ट ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है त्यागपत्र का कारण निजि बताये गये है। मेडिकल कालेज की प्रिंसिपल डॉ गीता जैन ने भी उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चिकित्सा शिक्षा विभाग मे चल रही मनमानी और गुट बाजी को सामने ला दिया है।


आपको बता दे कि वर्तमान में दून हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर डॉ रविंद्र बिष्ट नियुक्त है। और डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर दो डॉक्टर्स नियुक्त है,स्वास्थ्य विभाग से आये डॉ नंदन सिंह बिष्ट व डॉ विनम्र मित्तल
आश्चर्य जनक बात यह है कि राजकीय मेडिकल कालेज के विभागीय ढांचे में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट का पद तो सृजित है लेकिन डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट जैसा कोई पद सृजित ही नहीं है।


तो सवाल यह उठता है कि जो पद सृजित ही नहीं है उस पद पर नियुक्ति कैसे हुई, किसने दी और क्यों हुई
फिर दूसरा सवाल यह उठता है कि जिस पद का अस्तित्व नहीं है उस पद से त्यागपत्र कैसा!


विवेचना से पता चला है कि वैश्विक महामारी कोविड 19 के दौरान जब दून मेडिकल कालेज के हॉस्पिटल में संक्रमित मरीजों का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था। उस दौरान मेडिकल सुप्रीटेंडेंट पर कोरोना संक्रमण से खुद को बचाने के साथ साथ हॉस्पिटल पर अचानक से कई गुना ज्यादा बढ़ चुके मरीजों से जूझना पड रहा था। उन परिस्थितियों में अगर एमएस ही संक्रमित होकर कोरेंटीन हो जाते तो हॉस्पिटल और मरीजों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सँभालने के उद्देश्य से मेडिकल कालेज स्तर पर तत्कालीन प्रिंसपल डॉ आशुतोष सयाना ने अस्थायी रूप से इस व्यवस्था को बनाया था ताकि एमएस पर पड़ने वाले काम के दबाव व जिम्मेदारी को बंटवारा कर प्रदेश की जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जा सके।


आपको याद होगा कि कोविड19 संक्रमण के दौरान दून हॉस्पिटल में डॉ अनुराग अग्रवाल तत्कालीन मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर नियुक्त थे और उनकी मदद के लिये अस्थायी डिप्टी एमएस के पद पर डॉ धनंजय डोभाल को नियुक्त किया गया था


वैश्विक महामारी के उस दौर दून मेडिकल कालेज ने बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया था जिसकी काफी सराहना भी हुई थी।


अब बड़ा सवाल यह है कि जो पद नितांत अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुये बनाया गया था वह पद अभी तक अस्तित्व में क्यों बना हुआ है। और उस पद पर नियुक्ति क्यों किसके द्वारा दी जा रही है।
कुछ समय पूर्व दून हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार प्रक्रिया के दौरान मरीज बदलने की घटना के बाद से डिप्टी एमएस डॉ नंदन सिंह बिष्ट चर्चाओं का केंद्र बने हुये थे। अब डिप्टी एमएस पद से त्यागपत्र दिये जाने की घटना के बाद फिर चर्चाओ में आ गये है।


खोजबीन से यह भी पता चला है कि प्रदेश के कुछ मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट जैसे अस्तित्व विहीन पद पर बैठाये गये है।


सवाल यह भी है कि जो डॉक्टर्स बैठाये गये है वे किस अधिकार का उपयोग कर हॉस्पिटल्स कर्मचारियों को निर्देशित कर रहें है।


दून मेडिकल कालेज के गालियारों में इन दिनों प्रिंसपल डॉ गीता जैन,एमएस डॉ रविंद्र बिष्ट, डॉ नंदन सिंह बिष्ट, डॉ सुशील ओझा की कार्यशैली व गुटबाजी काफी चर्चाओं में है।
अगले एपिसोड में……

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