देहरादून:संवाददाता
लम्बे अर्से बाद उत्तराखंड में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा से जुडी एक अच्छी खबर सामने रही हैं राज्य निर्माण के 25 वर्ष बीत जाने के बाद आखिरकार रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड को अपना स्थायी कार्यालय मिलने जा रहा हैं। कुंवावाला स्थित उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कैंपस में आवंटित भूमि में परिषद के कार्यालय का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। थर्ड पार्टी ऑडिट के बाद बिल्डिंग हैंडओवर होते ही वर्षो से किराये के भवन में चल रहें परिषद के कार्यालय को स्थायी पता मिल जायेगा।
यह खबर सुनकर जितनी प्रसन्नता हो रही हैं आपको बता दें कि उससे ज्यादा आश्चर्य उक्त स्थायी भवन के लिये किये गये भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड की रजिस्ट्रार नर्वदा गुसाईं के संघर्ष को जानकर होगा। राज्य निर्माण के बाद से परिषद में लगभग 13-14 रजिस्ट्रार आये और गये,सभी आयुर्वेद विभाग से जुड़े अधिकारी थे शायद ही कभी किसी ने राज्य हित में परिषद के स्थायी भवन के लिये कोई पहल की हो। किराये के मकान में चल रहे कार्यालय में स्ट्रांग रूम की कोई उचित व्यवस्था होना संभव नहीं था जिससे आयुर्वेद पैरामेडिकल की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करना और परीक्षाओं की कापियों को सुरक्षित रखना दुष्कर कार्य रहता था। विगत कुछ वर्षों में प्रदेश में प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले जिस प्रकार सामने आएं हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि परिषद में स्थितियाँ कितनी चुनौतीपूर्ण रही होंगी।
प्रतिनियुक्ति पर परिषद में रजिस्ट्रार नियुक्ति हुई नर्वदा गुसाईं ने चार्ज लेने के साथ ही गोपनीयता और सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुये स्थायी कार्यालय हेतु दौड़ धूप शुरू कर दी। चौथी विधानसभा में डॉ हरक सिंह के आयुष मंत्री रहते हुये नर्वदा गुसाईं ने विभागीय कागजी कार्यवाही को न सिर्फ आगे बढ़ाया, साथ ही अपने निजि प्रयासों से लगातार कोशिश करती रही कि परिषद को कार्यालय हेतु भूमि आवंटित हो सके। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लायी और वर्ष 2021 में कुंवावला स्थित आयुष विवि के कैंपस में परिषद को 7500 वर्ग फीट भूमि आवंटित कर दी गयीं। लेकिन संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। भवन निर्माण के लिये डीपीआर तैयार की गयी कुल निर्माण लागत 3करोड़ 36 लाख आँकी गयीं लेकिन शासन ने भवन निर्माण के लिये धन आवंटित करने से हाथ खड़े कर दिये। बावजूद इसके नर्वदा गुसाई ने हिम्मत नहीं हारी और कार्यालय निर्माण हेतु तत्कालीन आयुष मंत्री से भूमि पूजन कर नींव कर पत्थर रखवाने मे सफल हुई, इसी दौरान सरकार में नेतृत्व परिवर्तन और फिर राजनितिक उठापटक होने से स्थितियाँ अनियंत्रित होने लगी, निजि स्वार्थ में डूबे सत्ताधारी दल से जुड़े राजनितिक कार्यकर्ताओं ने भी निर्माण कार्य की दिशा में अडचने पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सत्ता में रसूख रखने वाले आयुर्वेद से जुड़े कुछ लोग इस जुगाड़ में लगे हुये थे कि परिषद कार्यालय हेतु उनके निजि मकान दुगनी कीमत पर परिषद से खरीदवा लिया जाये,जिसका भूमि क्षेत्रफल भी आवंटित भूमि से न सिर्फ काफी कम था बल्कि मकान कर निर्माण भी कार्यालय उपयोग के बजाय आवासीय था तमाम रुकावटों और अडचनो के बावजूद नर्वदा गुसाईं आख़िरकार 20 नवंबर 2024 को बिना शासन और आयुर्वेद विभाग की वित्तीय मदद के परिषद कार्यालय कर निर्माण कार्य शुरू करने में सफल रही जिसका परिणाम यह हुआ कि मात्र 16 महीनों में 31 मार्च 2026 को 32 कक्ष वाले भवन का निर्माण कार्य पूरा भी कर लिया गया। नये निर्माण me अधिकारियों और कर्मचारियों के लिये प्रथक कक्ष के साथ ही गोपनीय कार्यों व परीक्षा और रिकॉर्ड रखे जाने से संबंधित सुरक्षित स्ट्रांग रूम भी तैयार किया गया हैं। नये कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करने हेतु आने वाले अभ्यर्थियों के लिये कैंटीन की भी व्यवस्था की गयीं हैं।
परिषद के स्थायी कार्यालय के निर्माण के संदर्भ में रजिस्ट्रार नर्वदा गुसाईं ने बताया कि निर्माण कार्य का सम्पूर्ण वित्तीय भार परिषद कार्यालय द्वारा वहन किया गया इसके लिये बैंक से भी किसी भी प्रकार का कोई लोन नहीं लिया गया है। जल्दी ही उद्घाटन के साथ ही रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद कार्यालय अपने स्थायी भवन में शिफ्ट करा लिया जायेगा।
अगर सरकारी व्यवस्था की खामियाँ उजागर करना मीडिया का कार्य हैं तो अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों के कार्यों को भी जनता के सामने रखना मीडिया की ही जिम्मेदारी हैं ताकि ऐसे अधिकारियों की भी हौसला अफजाई हो सके। बिना किसी सरकारी मदद के,समिति वित्तीय संसाधनों से लगभग 3.36 करोड़ की लागत से परिषद कार्यालय का निर्माण कार्य सफलता पूर्वक पूरा होना रजिस्ट्रार नर्वदा गुसाईं के वित्तीय प्रबंधन की कुशलता को भी दर्शाता हैं।
रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड का नवनिर्मित कार्यालय

