बादल फटने से टपकेश्वर मंदिर के गर्भ गृह तक पंहुचा तमसा मे बहकर आया मालवा

कुलदीप सिंह राणा/देहरादून
बीती 15 सितम्बर की रात देहरादून मे बादल फटने के प्राकृतिक घटनाक्रम ने नदियों के तटीय क्षेत्रों मे तबाही मचा दी है नदियों के जलस्तर मे आय चढाव से विश्व विख्यात टपकेश्वर शिव लिंग व मंदिर प्रांगड़ जलमग्न हो गया, नदी मे बढ़े हुये पानी के साथ साथ बहकर आये मलवे से टपकेश्वर का गर्भ गृह भर गया है।मिट्टी और मलवे से भरा मंदिर के गर्भ गृह का दृश्य 2013 के केदारनाथ मंदिर की स्थित की याद दिलाता है मंदिर से लगकर बहने वाली तमसा नदी का जलस्तर बीती रात लगभग 25 से 30 फीट ऊपर तक बढ़ गया था जिस कारण गर्भ गृह मे पानी और मलवा पहुंच गया।

सुबह होने तक तमसा नदी मंदिर प्रांगड़ मे तबाही के निशान छोड़ गयी वहीं नदी के दूसरे तट पर निर्मत हनुमान जी की मूर्ति व अन्य मंदिर निर्माण सब नदी के भयानक प्रवाह के कारण प्रभावित हुये है मंदिर भवनों को भी नुकसान हुआ है। मंदिर मे रहने वाले महंत व अन्य सेवादार सब सुरक्षित बताये जा रहे है प्रशासन ने भी फिलहाल इस क्षेत्र मे किसी भी प्रकार मानव क्षति की सूचना जारी नहीं की है।


ऐसा पहली बार नहीं है जब बरसात के दौरान तमसा नहीं के जल इस ऊंचाई तक पहुंचा हो लेकिन मंदिर प्रांगण से लगते क्षेत्र मे हो रहे अनियोजित निर्माण अब तबाही को आमंत्रित करने लगे है। नदी की तरफ जाने वाली मंदिर मार्ग की सीढ़ियां पानी मे डूबी हुई नजर आ रही है।

लाइम स्टोन से निर्मित प्राकृतिक चट्टान के नीचे टपकेश्वर शिवलिंग विराजमान है मान्यता है कि यह भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग है इस लिये इस क्षेत्र की धार्मिक एवं अद्यात्मिक मान्यता विश्व विख्यात है लेकिन अत्यधिक मानव दखल अब उक्त क्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने लगा है। सुबह सवेरे ही एसड़ीआरएफ व अन्य दल राहत एवं बचाव कार्य के लिये पहुंच राहत एवं बचाव कार्य मे जुट गये

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