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गैरसैण पार्ट-1: क्यों है जरूरी

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर
   राज्य आंदोलन के शुरुवाती समय से ही गैरसैण राजधानी उत्तराखंडवासियों को सुहाने सपने जैसा लुभाता रहा है।  गैरसैण का क्षेत्रीय भूगोल प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत दिखायी देता है यह अतिशयोक्ति नही होगा कि अन्य पहाड़ी राज्यों की राजधानियों की तुलना में गैरसैण ज्यादा सुंदर स्थान है।
फ़ाइल फोटो:- गैरसैण
  दूधातोली की सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह नगर सूरज के उगने से पहले ही जग जाता है। सूरज भी सबसे पहले दुधतोली की पहाड़ियों को गुड मॉर्निंग कहता है गैरसैण की तरफ बढ़ता है। पक्षियों के चहचहाने से पहले जगने वाले इस पहाड़ी क्षेत्र के वासी मैदानी क्षेत्रों की स्वाथ्य सम्बन्धी समस्याओं जैसे मोटापा,शुगर या दिल को दुरस्त करने के लिए नही जगते है वह जगते है पर्वतीय क्षेत्रों की जागृत अध्यात्मक चेतना से। पहाड़ों को जीतने वाले साहस से।
फ़ाइल फोटो:- गैरसैण
जस्टिस दीक्षित आयोग की रिपोर्ट ने भले ही गैरसैंण को राजधानी की दौड़ से बाहर कर दिया था किन्तु वह इसे उत्तराखंडवासियों के दिलों से बाहर नही कर सके।  पर्वतीय राज्य की अवधारणा इसकी विषम भौगोलिक परिस्थितियों एवं पिछड़ेपन के परिपेक्ष में गैरसैंण का अस्तित्व मात्र एक भू क्षेत्रफल का नहीं है, यह उत्तराखंड राज्य आंदोलन की आत्मा रही है। राज्य की अवधारणा में गैरसैंण का एक विशिष्ट स्थान रहा है जो विकास के मानकों पर राज्य को संतुलन प्रदान करता है।
फ़ाइल फोटो-मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत
ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषणा
वर्ष 2020 के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार सबको अचंभित करते हुऐ गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने की घोषणा की उसने पहाड़ वासियों के सपने को तो जैसे पंख लगा दिये है।
दो-दो राजधानी वाला राज्य में शुमार
उक्त घोषणा के साथ ही उत्तराखंड देश ऐसा पांचवां राज्य बन गया है जिसकी  2 – 2  राजधानियां हैं। आंध्रप्रदेश में 3 राजधानियों का प्रस्ताव है।तो हिमाचल एव महाराष्ट्र में 2-2 राजधानियां है केंद्र शासित होने से पहले जम्मू एवं कश्मीर की भी दो राजधानियां रही है।
ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा के दौरान इस क्षेत्र का  भी भ्रमण किये जाने के संकेत मिले है। तथ्यों के अनुसार उस दौरान गैलेसैन ,ब्रह्मपुरी साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। इसका उल्लेख केदारखण्ड में भी प्राप्त होता है। जिसमे इसे हिमालय के शक्तिशाली राज्यों में माना गया है। यहां महिला शासकों का वर्चस्व हुआ करता था।
मौसम एवं पर्यटन
ग्रीष्मकाल में यहां का तापमान 16से 32 डिग्री के बीच होता है। सर्दियों में तापमान 0 डिग्री तक पहुँच जाता है। चारों तरफ वन से घिरे होने के कारण ठंडी हवाएं इस क्षेत्र के बेहद सुरम्य होने का एहसास कराती है।
दोनो मंडलों के मध्य होने के कारण यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण नजर आता है। गैरसैंण के एक तरफ बद्रीनाथ, औली ,ग्वालदम  है तो दूसरी तरफ रानीखेत चौखुटिया जैसे पर्यटन स्थल है।

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