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उत्तराखंड भाजपा: कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जा सकते है त्रिवेंद्र सिंह रावत!

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा विधानसभा चुनाव 2022 न लड़ने सम्बन्धी पार्टी नेतृत्व को लिखे पत्र के बाद से उत्तराखंड में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उक्त पत्र से हर कोई हैरान है। कांग्रेस उन्हें चुनावी मैदान में उतरने के लिए ललकार रही है।

डोईवाला सीट से विधायक है त्रिवेन्द्र सिंह रावत-त्रिवेन्द्र सिंह रावत वर्तमान में देहरादून की डोईवाला विधानसभा सीट से विधायक है। रणनीतिक रूप जहां उनकी स्थिति काफी मजबूत रही है।

कार्यकारी अध्यक्ष हो सकते है त्रिवेन्द्र सिंह रावत-चुनाव न लड़ने सम्बन्धी त्रिवेन्द्र रावत ने शीर्ष पार्टी नेतृत्व को जो पत्र लिखा उसकी भाषा मे उन्होंने अपनी संगठन सेवाओ के क्षेत्र और सन्दर्भ पर ज्यादा फोकस किया हुआ है। आपको बताते चलें कि उत्तराखंड सरकार की कमान सौंपे जाने से पूर्व त्रिवेन्द्र रावत त्रिवेन्द्र रावत पार्टी में अपनी संघठनात्मक सेवाओं के लिये काफी चर्चित रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश के सहप्रभारी रहते हुये लोकसभा में बड़ी जीत हासिल करने में उनकी भी सकारात्मक भूमिका रही है।जिसके बाद मिले झारखंड भाजपा प्रभारी के दायित्व का निर्णवाहन करते हुए राज्य में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार लाने का श्रेय भी कहीं न कहीं त्रिवेन्द्र रावत को ही जाता है।पूर्व में भी वह महाराष्ट्र, पंजाब ,हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल के चुनाव अभियान में भी त्रिवेन्द्र रावत की सकारात्मक भूमिका रही है।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक(फ़ाइल फोटो)

हरिद्वार सीट से प्रत्याशी है मदन कौशिक- गुरुवार को जारी विधानसभा प्रत्याशियों की 59 नामो की सूची मदन कौशिक का नाम भी हरिद्वार सीट के जारी हुआ है वह इस सीट से विधायक भी है और चुनाव भी लड़ रहे हैं ऐसी परिस्थिति में वह प्रदेश भर में पार्टी के चुनाव अभियान कितना फोकस कर पाएंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक(फ़ाइल फोटो)

चुनावी माहौल में रणनीतिक रूप से प्रदेश भाजपा को कार्यकारी अध्यक्ष की आवश्यकता हो सकती है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक स्वास्थ्य संबंधी कारणों से खुलकर मैदान में नही दिख रहे है। वहीं त्रिवेन्द्र रावत एवं मदन कौशिक के मध्य राजनीतिक ट्यूनिंग काफी बेहतर कही जाती है। नेतृत्व परिवर्तन के बाद उपजे हालातों में मदन कौशक को उत्तराखंड भाजपा का अध्यक्ष बनाये जाने में त्रिवेन्द्र रावत की बड़ी भूमिका रही है। जबकि निशंक के साथ दोनों के सम्बन्ध उतने अच्छे नही कहे जाते है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में निशंक को  हरिद्वार लोकसभा सीट टिकट मिलने पर कौशिक धड़ा विरोध में खुल कर सामने आ गया था।जिसके बाद से पर्दे के पीछे एक दूसरे को शह मात देने का खेल अभी तक खत्म नही हुआ है। निशंक हरिद्वार लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद है। ऐसे में खुद मदन कौशक भी नही चाहेंगे कि निशंक कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जायें।

जिसे देखते हुए  हो सकता है कि वर्तमान हालातों में सन्तुलन साधते हुए चुनाव अभियान में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर शीर्ष नेतृत्व त्रिवेन्द्र सिंह रावत की क्षमताओं का लाभ ले सकती है।

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