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गुड न्यूज -पशुपालन 1 अगस्त से राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान योजना का द्वितीय चरण आरम्भ

उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद में 50 हजार पशुओं को सफलतापूर्वक गर्भित करने का लक्ष्य-सचिव पशुपालन  आर. मीनाक्षी सुन्दरम ।
अभियान 31 मई 2021 तक संचालित।
भारत की पहचान दुनिया मे एक ऐसे देश के है जो गांव में बसता है। जहां की आजीविका के संसाधनों में पशुपालन  मुख्य रूप से शामिल है। दुधारु गाय एवं भैंस के नस्ल में सुधार व वृद्धि के उद्देश्य से 1 अगस्त से सम्पूर्ण देश मे राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान योजना का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है यह अभियान मई 31,2021 तक संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद में 50 हजार पशुओं सफलतापूर्वक कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य रखा गया है यह जानकारी सूबे के सचिव पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने दी।
उत्तराखंड के पशुपालकों को देशी गाय व भैंस का लिंग वर्गीकृत वीर्य केवल 100 रूपए में उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का उद्देश्य पशु नस्ल में सुधार तथा उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता के पशुओं की संख्या में वृद्धि के साथ पशुपालकों की आजीविका में वृद्धि करना है।
राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान योजना द्वितीय चरण का लाभ पशुपालकों को प्रदेश के 13 जनपदों के सभी ग्रामों में राजकीय, बायफ, डेयरी व प्राइवेट कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध होगी। योजना अंतर्गत एक बार में पशु के गर्भित न होने पर दूसरी व तीसरी बार भी पशुपालकों को निःशुल्क कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा दी जायेगी। गाय-भैंसों के लिए समस्त प्रकार की देशी-विदेशी प्रजातियों के वीर्य उपलब्ध होंगे।  पशुओं को टैग लगाकार आधार की तरह पहचान पत्र दिया जायेगा व इनाफ पोर्टल पर राष्ट्रीय स्तर पर चिन्हित किया जायेगा।
 राजकीय व प्राइवेट कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को प्रत्येक गर्भाधान पर 50 रूपए व संतति पर 100 रूपए देय होगा। उत्तराखंड सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा गत वर्ष देशी गाय भैंस के लिंग वर्गीकृत वीर्य से 3.00 लाख पशु गर्भित करने का लक्ष्य है, जिसके लिये केवल 100 रू. का शुल्क पशुपालकों से लिया जायेगा जिसका वास्तविक मूल्य 1150 रूपए है। इसके उपयोग से 90 प्रतिशत तक केवल बछिया पैदा होंगी और पशुपालकों की उत्पादकता बढ़ेगी।
सूबे में रोजगार की दिशा में डेयरी उत्पादन को लेकर राज्य सरकार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अंतर्गत जनहित मे पशुपालन की अनेक योजनाएं ला रही है जिनका उद्देश्य राज्य में स्वरोजगार के साथ-साथ राज्यवासी की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना भी है। ऐसे में राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान योजना का द्वितीय चरण राज्य के पशुपालकों के लिए दोहरा लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

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