दून मेडिकल कालेज :महिला शौचालय में ताला तो पुरुष शौचालय का उपयोग करने को मजबूर गर्भवती महिलाये।

कुलदीप सिंह राणा /ग्राउंड जीरो/स्थान -राजकीय दून मेडिकल कालेज देहरादून/ समय -9:00PM रात्रि /01-06-2026
रात के 9 बज रहें है राजधानी स्थितराजकीय दून मेडिकल कालेज की ओपीडी के प्रथम तल पर स्थित रेडियोलाजी विभाग में काफी गहमा गहमी है गर्भवती महिलायें व मरीज जिनमे कुछ तो व्हिल चैयर पर लाये गये हैं बड़ी संख्या में एकत्र है सभी अपनी अपनी बारी का इंतजार रहे हैं । रात्रि के इस प्रहर में दून हॉस्पिटल में पीपीपी मोड़ पर संचालित किये जा रहें रेडियोलाजी विभाग में अल्ट्रासाउंड किया जा रहा। जबकि बगल में स्थित एक्स-रे कक्ष में ताला लगा हुआ है। जाहिर है कि मरीजों के परिक्षण का यह निर्धारित समय नहीं है।


पूछे जाने पर पता चला कि पीपीपी मोड़ पर संचालित हो रही अल्ट्रासाउंड व्यवस्था में देर रात तक टेस्ट किये जाते हैं। बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाये व अनेक मरीज अल्ट्रासाउंड हेतु काफी मात्रा में पानी पीकर अपनी बारी का इंतजार करते हुये प्रथम तल के गालियारे में टहल रहें है। जिन गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हो चुके है पानी पिने की वजह से उनके चेहरे पर शौच का भारी दबाव स्पस्ट दिख रहा है।

टेस्ट के बाद जब यह महिलाये शौच के लिये प्रथम तल पर स्थित शौचालय जाती है तो देखती है कि वहाँ महिला शौचालय में ताला लटका हुआ है और पुरुष शौचालय खुला हुआ है।शौच के दबाव की उस स्थिति में वह सब ग्राउंड फ्लोर पर स्थित शौचालय का रुख करती है पहुंच कर देखती है कि वहाँ भी मोटा ताला लटका हुआ है इसके बाद उसकी दबाव में वह महिलाये सेकंड फ्लोर पर स्थित शौचालय पहुँचती है उक्त गालियारे में अंधेरा पसरा हुआ और वहाँ भी उन्हें ताला लटका हुआ मिलता है यह स्थित राजधानी के उस मेडिकल कालेज की है जो सचिवालय से मात्र 15-20 मिनट की दूरी पर शहर के बीचों बीच स्थित है।


ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मी से पूछने पर पता चला कि थर्ड फ्लोर पर महिला शौचालय खुला हुआ है, गर्भवती महिलाये सीढ़िया चढ़ कर थर्ड फ्लोर पर पहुँचती है और महिला शौचालय खुला देख राहत की सांस लेती है।
लेकिन कुछ गर्भवती महिलाये की स्थिति जब नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो वह प्रथम तल पर खुले हुये पुरुष शौचालय का उपयोग करने को भी मजबूर हो जाती है। महिलाओं द्वारा गर्भवस्था के दौरान मज़बूरी में पुरुष शौचालय का उपयोग उनमें संक्रमण के खतरा बढ़ा सकता है क्या यह डॉक्टर्स को नहीं पता होगा।


आपकी जानकारी के लिये बता दे कि रात्रि के इस प्रहर में थर्ड फ्लोर स्थित यह शौचालय किसी मरीज के लिये नहीं बल्कि वहाँ स्थित सेंट्रल लैब में कार्य करने वाले अस्पताल कर्मियों के लिये खुली रखी गयीं है।


प्रदेश कि राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में गर्भवती महिलायों व मरीजों को लेकर कितनी संवेदनशिलता है अब इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते है।


पूछताछ करने पर पता चला कि शौचालयों में चोरी कि आशंका से ताला लगाया जाता है।


आपको यह भी बता दे कि वर्तमान में राजकीय दून मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ गीता जैन है अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट पद पर डॉ रविन्द्र बिष्ट नियुक्त है साथ ही उनके सहयोग के लिये डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ नंदन सिंह बिष्ट भी नियुक्त है।


अल्ट्रासाउंड करवाने आये गर्भवती महिलाओं और मरीजों के प्रति यह लापरवाही क्या दून मेडिकल कालेज व अस्पताल प्रशासन की पेशेवर गैर जिम्मेदाराना आचरण को नहीं दर्शा रही है।
अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों की सवेंदनहीनता के कारण महिलाये व मरीज उस अवस्था में शौच के लिये कभी ग्राउंड फ्लोर तो कभी थर्ड फ्लोर ऊपर नीचे जाने को मजबूर दिख रहें है।

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