- 543 से बढ़ाकर 824 सीटें करने का सुझाव.
- दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं.
- परिसीमन 2027 की जनगणना के आधार पर.
Kuldeep Singh Rana/Dehradun /26-06-3026
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक वर्किंग पेपर में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर नया मॉडल प्रस्तावित किया गया है। इसमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 824 करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि मौजूदा 373 सीटों में कोई बदलाव न किया जाए, जबकि 170 सीटों का पुनर्गठन कर 281 नई सीटें बनाई जाएं। इसका उद्देश्य परिसीमन के दौरान उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखना है।
उत्तर-दक्षिण संतुलन पर जोर
वर्किंग पेपर का दावा है कि नए मॉडल से दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
दक्षिणी राज्यों (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल) की हिस्सेदारी 23.7% से घटकर 23.6% रहने का अनुमान है।
वहीं उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र) की हिस्सेदारी 45.6% से घटकर 45.2% रहने का अनुमान जताया गया है।
मिजोरम, सिक्किम, पुडुचेरी, लद्दाख, अंडमान-निकोबार, नागालैंड, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप जैसे छोटे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सीटें दोगुनी करने का सुझाव।
रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसीमन 2027 की जनगणना के आधार पर किया जाए।
परिसीमन का आधार केवल जनसंख्या नहीं होगा, बल्कि मतदाताओं की संख्या, शहरीकरण, सामाजिक संरचना और प्रशासनिक सुविधा जैसे कई मानकों को भी शामिल किया जाएगा। सभी बड़े राज्यों की लोकसभा सीटों में लगभग 50% वृद्धि की जाए।

प्रस्ताव के अनुसार:
59 संसदीय क्षेत्रों को दो भागों में विभाजित किया जाएगा।
111 संसदीय क्षेत्रों को तीन भागों में बांटा जाएगा।
इससे कुल 281 नई लोकसभा सीटों का सृजन होगा और कुल संख्या 824 हो जाएगी।
किन आधारों पर होगा परिसीमन
रिपोर्ट में 2009 से 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित मानकों को आधार बनाने का सुझाव दिया गया है—
- संसदीय क्षेत्र का आकार
- शहरीकरण का स्तर
- अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी
- अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी
- भाषाई विविधता
- मतदान केंद्रों की उपलब्धता

नए मॉडल के लागू होने पर मतदान प्रतिशत में लगभग 2.3% वृद्धि का अनुमान।
हालांकि यह केवल एक वर्किंग पेपर है। इसे सरकार की आधिकारिक नीति या अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। परिसीमन से संबंधित किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया, जनगणना के आंकड़े और संसद की स्वीकृति आवश्यक होगी।
यह वर्किंग पेपर ईएसी-पीएम की सदस्य डॉ. शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के प्रो. मुदित कपूर ने तैयार किया है।
