दून अस्पताल में नियुक्त तीन डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट नियमानुसार वैध या अवैध

  • राजकीय दून हॉस्पिटल में अब तीन डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट.
  • विभागीय ढांचे में नहीं हैं डीएमएस जैसा कोई पद.
  • मेडिकल सुप्रीटेंडेंट द्वारा भी नहीं की गयी डीएमएस की नियुक्ति से सबंधित कोई मांग.
  • डीएमएस नियुक्ति हेतु चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से भी नहीं ली गयी अनुमति.

कुलदीप सिंह राणा/ देहरादून /25-06-2026
राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कालेज में डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की संख्या अब बढ़ाकर तीन कर दी गयी है 18 जून को प्रिंसिपल डॉ गीता जैन द्वारा दून अस्पताल में डॉ विनम्र मित्तल के अतिरिक्त दो अन्य डॉक्टर्स को डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर नियुक्त किया गया है।
डॉ नंदन सिंह बिष्ट के त्यागपत्र के बाद उनकी सारी जिम्मेदारी अब सर्जरी विभाग में कॉन्ट्रेक्ट पर नियुक्त एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विनम्र मित्तल को सोंपी गयी है।इसके अलावा एनस्थीसिया विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ शोभा वी को डीएमएस इमरजेंसी व न्यूरो सर्जरी विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ अमित कुमार को डीएमएस प्रसासनिक समन्वयक व पर्यवेक्षण का कार्य सौंपा गया है।


आश्चर्य की बात यह है कि दून मेडिकल कालेज में विभागीय पदों के गठन संबंधित 19 नवंबर 2015 को तत्कालीन प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा ओम प्रकाश द्वारा जारी आदेश में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के अतिरिक्त डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट जैसा कोई पद सृजित नहीं है


“शब्द संसद ” द्वारा उक्त आदेश के आधार पर डॉ नंदन सिंह बिष्ट के डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद से त्यागपत्र की प्रचारित खबरों पर पहले भी सवाल उठाया गया था।

लेकिन नये घटनाक्रम में शासन के उक्त आदेश के विपरीत प्रिंसिपल द्वारा दून मेडिकल कालेज हॉस्पिटल में दो अतिरिक्त डीएमएस की नियुक्ति कर दी गयी है।


डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट पद पर नियुक्तियों के संदर्भ में प्रिंसपल डॉ गीता जैन से फोन पर बात की गयी। उन्होंने कहा कि दून अस्पताल में कार्य की अधिकता बहुत है आंतरिक व्यवस्था बनाने के लिये हमने यह नियुक्तियाँ की है और यह व्यवस्था पहले से चली आ रही है।


जबकि हॉस्पिटल में व्यवस्थाओं के लिये नियमानुसार दून सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट नियुक्त है। वर्तमान समय में प्रदेश में न तो कोई मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है और न ही देश में कोविड 19 पेंडमिक जैसे कोई हालात, तो फिर अचानक दून हॉस्पिटल में कार्य की अधिकता कैसे बढ़ गयी?
यही नहीं प्रदेश के कुछ अन्य राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी प्रिंसपल द्वारा पृथक से डीएमएस नियुक्त किये हुये है।

जब शब्द संसद संवाददाता द्वारा दून हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ रविन्द्र बिष्ट से पूछा, क्या कार्य की अधिकता के आधार पर उन्होंने प्रिंसपल से अतिरिक्त डीएमएस की मांग की थी।
डॉ रविन्द्र बिष्ट ने स्पस्ट किया कि उनके द्वारा डीएमएस की नियुक्ति से सबंधित कोई मांग नहीं की गयी थी
क्या प्रिंसिपल द्वारा नियुक्त यह तीनो डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट हॉस्पिटल में नियमानुसार नियुक्त मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ रविन्द्र बिष्ट के निर्देशो का पालन करंगे ?


प्रभारी निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ अजय आर्य से सवाल किया तो उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल द्वारा निदेशालय से दून हॉस्पिटल में डीएमएस के पद सृजन और नियुक्तियों से सबंधित किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं मांगी गयीं थी।


अब सवाल उक्त नियुक्तियों की वैधता और प्रिंसिपल डॉ गीता जैन की मंशा पर खड़े हो रहें है।


जब मेडिकल सुप्रीटेंडेंट ने पृथक से नियुक्ति की कोई मांग नहीं की, निदेशालय से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गयी तो फिर प्रिंसिपल द्वारा तीन डीएमएस नियुक्त किस आधार पर की गयी है।

तो क्या प्रदेश में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल्स द्वारा अपनी शक्तियों का दुरूपयोग किया जा रहा है।


क्या नियम विरुद्ध नियुक्त हुये इन तीनो डीएमएस द्वारा दून हॉस्पिटल में लिये गये प्रशासनिक निर्णय किस आधार पर वैध माने जायेंगे।


दिन प्रति दिन अख़बारों में उजागर होती दून मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्था, जिम्मेदारियों से त्यागपत्र देते डॉक्टर्स, नियम विरुद्ध मनमर्जी से की जा रही नियुक्तियों राजधानी की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में सुशासन की पोल खोल रही है।


उक्त तमाम घटनाक्रम अस्पतालों के औचक निरीक्षण करने वाले नव नियुक्त चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल व शासन में बैठे सचिव विनय शंकर पाण्डेय क्यों आँख बंद किये हुये है।


चिकित्सा शिक्षा में व्याप्त यह अराजकतायें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सुशासन के दावे को ठेंगा दिखा रही है।

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