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व्यापारी नेताओं द्वारा बाजार बंद के निर्णय का दुकानदारों ने किया विरोध

 

बिना दुकानदारों की सहमति के थोपे जाते है निर्णय

व्यापारी नेताओं के बाजार बंदी के निर्णय खिलाफ देहरादून के दुकानदारों  में विरोध के स्वर उठने लगे है। दुकानदारों के एक बड़े धड़े ने व्यापारी नेताओं पर कोरोना महामारी की आड़ में अपनी राजनीति चमकाने के आरोप लगाते हुए बाजार बंदी का विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि यह चंद व्यापारी नेता बिना दुकानदारों की सहमति के अपने फैसले थोप रहे हैं। रविवार के बंद को लेकर सभी दुकानदार एकमत है। लेकिन हर अन्य दिन भी बंद किया जाना बेहद नुक़सानदेय साबित होगा।

कभी खरीदारों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला पलटन बाजार कोरोना की मार से सुनसान नजर आने लगा है।

दुकानदारों का बाजार बंद किये जाने को लेकर क्या कहना है इस संदर्भ में संवाददाता राइजिंग उत्तराखंड ने दुकानदारों से बात कर उनका मत जाना…

मिष्ठान विक्रेता सत्यव्रत बडोनी का कहना है

सत्यव्रत बडोनी

कि बन्द ही करना है तो दो दिन सम्पूर्ण लॉक डाउन करो। बाजार बंद करने से क्या जनता सड़कों पर नही निकलेगी।

                 दुकानदार अजय बहल                 लॉक डाउन के कारण पहले से ही छोटे एवं मझोले दुकानदारों की कमर टूट रखी है। ऐसे में बाजार बंद किये जाने का यह तुगलकी निर्णय दुकानदारों को बरबाद करने वाला हैं। व्यापारी नेता दुकानदारों को मदद देने की बात करने के बजाए उसी के पेट पर लात मारने पर तुले हुए हैं।

कुछ दुकानदार दिल्ली सरकार के फैसले का हवाला देते हुए कहते हैं कि वहां की सरकार ने सारा बाजार खोल दिया है जबकि वहां केस उत्तराखंड के मुक़ाबले कई गुना अधिक है। सभी दुकानदार सरकार द्वारा बताई गाइड लाइन का पालन कर रहे है व्यापारियों ने सरकार को सुझाव भी दिया कि ज्यादा भीड़ भाड़ वाले आढ़त बाजार में दुकानदारों व खरीदारों के लिए समय तय कर भीड़ को नियंत्रित कर सकते है। दोपहर 12 बजे से पहले दुकानदार व उसके बाद आम खरीदार। जो व्यापारी नियमो का पालन नही करता उसके विरुद्ध एक्ट के अनुसार कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाये।

                   दुकानदार मनु डोरा।                     क्या दो दिन बाजार बंद होने से कोरोना का प्रसार रुक जाएगा या सोशल डिस्टेंसिंग के नियमो का पालन करने मास्क पहनने से रुकेगा                   

किराना दुकानदारों का कहना है कि शराब की दुकानों के लिए समय रात 11 बजे तक औऱ अन्य दुकानदारों के लिए 8 बजे तक वो भी सप्ताह में मात्र 5 दिन ,यह कहाँ तक तर्कसंगत है। क्या कोरोना सिर्फ हमारी दुकानों से फैलेगा या रुकेगा।

तीरथ राज अरोड़ा

रेडीमेड कपड़ो के दुकानदार तीरथ राज अरोड़ा के कहना है कि बाजार बंद होने से लोग पिकनिक मनाने मसूरी से लेकर मालदेवता तक पहुच जाते है जिससे ट्रैफिक जाम रहता हैं। वहां कदम रखने की जगह नही होती है। सरकार को वहां ज्यादा ध्यान देना चाहिए।हम सरकार के साथ है किंतु व्यापारी नेताओं के मनमर्जी भरे फैसले के साथ बिल्कुल नही है। दुकानो में अनेक लोग सेल्समैन का काम करते है। उनका वेतन निकलना मुश्किल हो रहा है सबके परिवार है कोरोना महामारी के कारण वैसे ही बाजार से ग्राहक गायब है। जब बिक्री नही होगी। तो दुकानदार दुकान का किराया, सेल्समैन की सैलरी, बैंक के लोन की किश्त कहाँ से निकलेगा।

जतिन सबरवाल

रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी जतिन सबरवाल का कहना है कि यदि व्यापारी नेता बाजार के सेनेटाइज़ेशन को लेकर तो कुछ काम करते तो सभी दुकानदार उनका साथ देते। बेमतलब दुकानदारों पर बाजारबन्दी थोपी जा रही है। हम इसका विरोध करते है।

 

 

 

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