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कुपोषण से मुक्त उत्तराखंड की दिशा में सफल होते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के प्रयास

कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा किये गये प्रयास अब अपना असर दिखाने लगा है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के  अवसर पर आवास स्थित सभागार में मुख्यमंत्री ने कुपोषण मुक्त हुए बच्चों के माता पिता को सम्मानित किया।

पोषण हेतु माता एवं उसकी सन्तान को फलों की टोकरी भेंट करते मुख्यमंत्री

आपको बताते चले कि स्वंय त्रिवेंद्र रावत ने एक गरीब परिवार की कुपोषित बच्ची को गोद लिया हुआ है जिसके स्वास्थ एवं पोषण की स्थिति को लेकर वह स्यंम सजग रहते है उक्त बच्ची अब पहले से काफी बेहतर स्थिति में है बच्ची के पोषण स्तर में भी तेजी से सुधार हुआ है साथ ही मुख्यमंत्री योजना अंतर्गत सम्पूर्ण प्रदेश में कुपोषण के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान पर भी नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के कुपोषण मुक्त भारत के अभियान के संदर्भ में स्वयं सेवी संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा बच्चों को गोद लेकर उनको कुपोषण मुक्त करने की दिशा में अच्छा कार्य करने पर प्रशंशा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष पूर्व अति कुपोषित बच्चों को गोद लेने का जो अभियान शुरू किया गया था, इसके अच्छे परिणाम रहे। बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने में माँ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों की नियमित एवं संतुलित खान-पान से कुपोषित बच्चे जल्द सामान्य श्रेणी में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के कुपोषित होने पर उसका नुकसान न केवल बच्चे के माता-पिता पर पड़ता है, बल्कि पूरे समाज को इसका नुकसान होता है। कुपोषण मुक्त भारत बनाने के लिए हम सबको प्रयास करने होंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित सम्बंधित बच्चे एवं उनकी मातायें

इस अवसर पर सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास सौजन्या ने कहा कि कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए शुरू किये गये गोद अभियान को आगे भी जारी रखा जायेगा। विगत वर्ष अभियान की शुरूवात के समय राज्य में 1700 अति कुपोषित एवं 12 हजार कुपोषित बच्चे थे। इस अभियान के तहत 9 हजार 177 बच्चों को गोद लिया गया। जिसमें से 2349 बच्चों के ग्रेड में सुधार हुआ है। बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से टेक होम राशन का घरों में वितरण किया जा रहा है। सरकार द्वारा अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों को प्रति सप्ताह दो-दो दिन अण्डा, केला एवं दूध दिया गया, इससे भी बच्चों को कुपोषण से सामान्य श्रेणी में लाने में मदद मिली।

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