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“आप” के कर्नल को कमान से क्या मचेगा घमासान!

कुलदीप एस राणा,देहरादून
 कर्नल(सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है इस घोषणा के साथ ही आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में जनादेश पाने हेतु अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया है। उक्त घोषणा के लिये बाकायदा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मंगलवार की सुबह देहरादून के सर्वे चौक स्थित आइटीडीए ऑडिटोरियम में पहुंचे।
आम आदमी पार्टी(प्रतीकात्मक फोटो)
जहां भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर घोषणा के अनेक तीर छोड़े गये जिसके बाद समर्थकों एवं मीडिया कर्मियों से खचाखच भरे हॉल में अरविंद केजरीवाल द्वारा अजय कोठियाल को आगमी चुनाव हेतु सीएम के रूप में प्रस्तुत करने की घोषणा की गई। इस घोषणा के साथ ही सूबे में सीएम का चेहरा देने वाली “आप” पहली पार्टी बन गयी है। अब सवाल उठता है कि क्या कर्नल कोठियाल की लोकप्रियता के भरोसे आप पार्टी चुनाव में सूबे के वोटरों को कितना साध पायेगी? अन्ना आंदोलन के गर्भ से जन्मी दिल्ली की आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में पूर्व सैन्य अधिकारी के कंधे पर बंदूक रख सत्ता को टारगेट करने की कोशिश में है।
आम आदमी पार्टी(प्रतीकात्मक फोटो)
 कुछ माह पूर्व जब दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया देहरादून आये तो जाते जाते कोठियाल को लेकर कुछ संकेत दे गये। इन संकेतों से आप के शीर्ष नेतृत्व ने सूबे में पार्टी के भीतर कोठियाल की स्वीकार्यता को भी परखने का प्रयास किया। उत्तराखंड में राजनीतिक घुसपैठ की कोशिशों में जुटी आप पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व ने भले ही मंगलवार 17 अगस्त को एक सेवानिवृत्त कर्नल को2022 हेतु चुनाव की कमान सौंप दी हो किन्तु प्रदेश में उनकी नीतियों एवं घोषणाओं का इनकाउंटर भाजपा एवं कांग्रेस द्वारा काफी पहले से किया जाने लगा था। मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर दोनों राष्ट्रीय दलों के कार्यकर्ता आप पार्टी की नीतियों पर लगातार टारगेट प्रैक्टिस कर रहें है। यहाँ गौर करने वाली बात है कि क्या कर्नल आप पार्टी के राजनीतिक व्याकरण को पूरी तरह समझते भी है ? चूंकि अब उत्तराखंड में कर्नल कोठियाल आम आदमी पार्टी के कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किये जा चुके है।
लेकिन उनकी चुनौती का जवाब देने के लिए प्रदेश के दोनो राष्ट्रीय दलों के सैन्य प्रकोष्ठ में सिपाहीयों से लेकर जनरल तक की एक बड़ी फ़ौज भी खड़ी है जो रणनीतिक रूप से बेहतर सक्रिय है। इनकी सक्रियता एवं स्वीकार्यता  का राज्य में क्या आलम है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शुरुवाती दौर के पं एनडी तिवारी शासन काल मे लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) टीपीएस रावत कैबिनेट मंत्री रह चुके है वही उनके कई कदम आगे
भाजपा की तरफ से मेजर जनरल(से.नि) बीसी खंडूरी  केंद्रीय मंत्री से लेकर सूबे के सीएम की कुर्सी संभाल चुके है। शुरुवाती समय से ही सूबे के सैन्य परिवारों का वोट बैंक इन दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच बटता रहा है। ऐसी सिचुएशन में प्रदेश के सैनिक वोट बैंक पर सर्जिकल स्ट्राइक करने में कर्नल कितने सफल हों पाते है इसके सबूत तो 2022 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को मिल ही जायेंगे।
फिलहाल प्रदेश में आप की धमक से दोनों राष्ट्रीय दलों में हलचल जरूर देखने को मिल रही है।

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