क्या शपथपत्र में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने के आरोपी डॉ जेएन नौटियाल को बचा रही है सरकार ?

कुलदीप सिंह राणा /देहरादून

एमडी अध्यन्न हेतु शासन को दिये शपथ पत्र में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने के आरोपी है डॉ जे एन नौटियाल.
-आरोपी होने के बावजूद बनाया गया भारतीय चिकित्सा परिषद का अध्यक्ष.
-सियासी संरक्षण के चलते डॉ जे एन नौटियाल पर कार्यवाही से बच रहे शासन के अधिकारी.

एमडी/एमएस अध्यन्न हेतु शासन को दिये शपथ पत्र में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने के आरोपी भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ जे एन नौटियाल की फाइल पर कार्यवाही में हों रही लेट लतीफ से सवाल उठने लगे है कि कहीं उत्तराखंड शासन में बैठे आयुर्वेद विभाग के अधिकारी,डॉ नौटियाल के आगे सरेंडर तो नहीं कर चुके है, वरना और क्या कारण हों सकता है कि शैक्षिणिक अवकाश हेतु शपथ पत्र में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने संबंधी प्रकरण में अपर सचिव द्वारा दो दो बार कारण बताओ नोटिस दिये जाने के बाद भी शासन आरोपी डॉ नौटियाल का बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है। कहीं सियासी संरक्षण से पोषित हों रहे डॉ नौटियाल की जाँच फाइल को अधिकारियों ने ठन्डे बस्ते में तो नहीं डाल दिया है? इसकी सम्भावना से भी इंनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि डॉ नौटियाल की पत्नी सत्ता धारी दल की नेत्री जो ठहरी।


पाठकों को बताते चले कि आयुर्वेद विभाग में चिकित्सा अधिकारी रहते हुये सेवानिवृति से लगभग 3-4 वर्ष पूर्व वर्ष 2017 में डॉ नौटियाल द्वारा एमडी के अध्यन्न हेतु शासन के समक्ष जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था उसमे शेष राजकीय सेवाकाल से संबंधित” तथ्यों को जानबूझ कर तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है “। ऐसा प्रथम नोटिस जारी करते समय शासन द्वारा कहा गया था। क्योंकि वित्तीय हस्त पुस्तिका के नियमानुसार डॉ नौटियाल 3 वर्षीय एमडी कोर्स हेतु राजकीय अध्यन्न अवकाश के लिये पात्र नहीं हों सकते थे। क्योंकि एमडी की पढ़ाई के उपरांत लाभार्थी को कम से कम 3 वर्ष राजकीय सेवा में होना अनिवार्य है जबकि एमडी की पढ़ाई पूर्ण होने के लगभग एक वर्ष बाद ही डॉ नौटियाल अपनी अधिवर्षिता आयु पूर्ण कर राजकीय सेवा से सेवानिवृत हों गये थे। जो स्पस्ट रूप से वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों का उल्लंघ्न था। इतना ही नहीं सियासी संरक्षण के चलते डॉ नौटियाल द्वारा अध्यन्न के तीसरे वर्ष में अपना पूर्ण वेतन भी जारी करवा लिया गया था। सेवानिवृति के समय ज़ब यह प्रकरण तत्कालीन अपर सचिव आयुष राजेंद्र सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने डॉ नौटियाल को दोषी पाते हुये तत्काल नोटिस जारी कर दिया।
किन्तु विडंबना देखिये कि राजकीय नियमों के अंतर्गत आरोपी डॉ नौटियाल पर कारवाही के बजाय प्रदेश सरकार ने उन्हें भारतीय चिकित्सा परिषद का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। हालांकि अध्यक्ष के पद उनकी नियुक्त आदेश भी एक्ट में दी गयी व्यवस्थाओं के अंतर्गत कटघरे में हैँ।इसका खुलासा हम खबर के अगले पार्ट में करेंगे।
खैर उक्त प्रकरण पर ज़ब #Risinguttarakhand न्यूज़ पोर्टल द्वारा सवाल उठाये गये तो 2वर्ष वाद 11 सितम्बर 2024 को शासन ने दोबरा डॉ नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने को कहा।लेकिन सत्ता की हनक में डॉ नौटियाल ने शासन को ठेंगा दिखाते हुये अपनी सुविधानुसार समय लेते हुये अक्टूबर माह में जवाब दिया। जिसके बाद से शासन में डॉ नौटियाल के विरुद्ध कार्यवाही संबंधी फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूम रही हैँ और अधिकारी उस पर न्यायोचित कार्यवाही करने से बच रहे हैँ।

पूर्व में प्रकाशित खबर का लिंक- कार्यवाही के बजाय डॉ जेएन नौटियाल पर क्यों मेहरबान है उत्तराखंड सरकार?
https://shabdsansad.com/karywahi-ke-bajay-dr-jn-noutiyal-pr-kyon-meharban-hai-uttarakhand-sarkar/

उक्त प्रकरण पर ज़ब भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत अधिकारियों से चर्चा की गयी तो उनका कहना था यदि नियमानुसार कार्यवाही होती है तो दंडात्मक कारवाही के साथ साथ 3वर्षीय अध्यन्न अवकाश के दौरान राजकोष से जारी वेतन की एक मुस्त रिकवरी भी हों सकती है और राशि करोड़ों में हों सकती है।
वहीँ यह भी संज्ञान में आया है कि सचिवालय स्तर के एक प्रमोटी सचिव व मुख्यमंत्री कार्यालय के एक निजी सचिव कि भूमिका भी उक्त प्रकरण में संदिग्ध मानी जा रही है।ऐसे में सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री के अधीन आयुष विभाग सिर्फ दोषियों को संरक्षण देने और नये नये पदों पर अलंकृत करने के लिये जाना जायेगा या कभी दोषियों पर न्यायोचित कार्यवाही भी होंगी?

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