कुलदीप सिंह राणा, देहरादून, 28/05/2026
“जब रोम जल रहा था तब नीरो बांसुरी बजा रहा था यह कहावत रोमन सम्राट नीरो के विषय में प्रसिद्ध हैं कहा जाता हैं एक बार जब रोम में भीषण आग लगी थी सारा शहर जल रहा था तब नीरो शहर से दूर अपने आशियाने में संगीत का आनंद ले रहा था।

कमोबेश ऐसी ही स्थिति कुछ उत्तराखंड में भी दिखायी दे रही हैं।
उत्तराखंड के जंगल धधक रहें हैं पर्वतीय क्षेत्रों की जनता में हाहाकार मचा हुआ है। चमोली और टिहरी में वनाग्नि से दो लोगों की मौत हो चुकी हैं हजारों पेड़ और करोड़ों की वन सम्पदा जलकर खाक हो चुकी है,सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो चुके हैं।
प्रदेश में वनाग्नि की घटनायें घटने के बजाये बढ़ती ही जा रहा रही हैं स्थितियाँ भयावह हो गयीं है अनेक स्थानों पर जंगल की आग रिहाइसी इलाकों के करीब पहुंच चुकी हैं। आपदा की इस घड़ी में एक बार फिर जनता पूछ रही हैं कहाँ हैं हमारे माननीय वन मंत्री सुबोध उनियाल।

यह कोई नई बात नहीं हैं जब प्रदेश के जंगल धधक रहें हो और वन मंत्री अपने जिम्मेदारी पर खरे उतरते दिखायी दिये हो !
वन विभाग द्वारा 15 फरवरी से 15 जून तक समय प्रदेश में फारेस्ट फायर सीजन घोषित किया जाता हैं। फारेस्ट फायर से निपटने को लेकर मंत्री और अधिकारियों एसी कमरों में बैठ कर कई मैराथन बैठके करते है और मीडिया के समक्ष फारेस्ट फायर से निपटने के बड़े बड़े दावे किये है।लेकिन सारे दावों की पोल उस वक्त खुल जाती है जब आग जंगलों को अपनी चपेट में ले लेती है।
आंकड़ों की माने तो विगत 10 वर्षों में उत्तराखंड में फारेस्ट फायर की 14638 घटनाएं दर्ज हुई है। जिनमे लगभग 23682 हेक्टेयर वन सम्पदा जलकर नष्ट हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि फारेस्ट फायर से प्रतिवर्ष अनेक लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

उत्तराखंड का बड़ा वन क्षेत्र इन दिनों आग से दहक रहा है पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली, चकराता,पौड़ी और रुद्रप्रयाग वनाग्नि से सर्वाधिक प्रभावित जनपद है।
फायर सीजन में इस वर्ष अभी तक प्रदेश में वनाग्नि की कुल 394 घटनाएं हुई है जिनमे 331 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र आग की भेंट चढ़ चुका है। सर्वाधिक 282 घटनायें गढ़वाल मंडल में दर्ज की गयीं है, कुमायूँ क्षेत्र में 74 घटनायें सामने आयी है। सर्वाधिक 72 घटनाएं तो अकेले बद्रीनाथ वन प्रभाग में दर्ज हुई है। जिसमे लगभग 25 हेक्टेयर जंगल जल चुका है।
प्रदेश के गढ़वाल वन प्रभाग में आग से सर्वाधिक 39.40 हेक्टेयर जंगल नष्ट हो चुका है।कालसी वन प्रभाग में 30.55, पिथौरागढ़ में 31.25, रुद्रप्रयाग में 25.62, बद्रीनाथ में 24.69, केदारनाथ वाइल्ड लाइफ डिवीजन में 22.50, अलकंनंदा डिवीजन में 18.50, चकराता में 18.65, टिहरी में 17.70, उत्तराकाशी में 13 हेक्टेयर जंगल स्वाहा हो चुका है अकेले वन मंत्री सुबोध उनियाल की विधानसभा क्षेत्र नरेंद्र नगर में ही 19हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है।
जिलेवार फारेस्ट फायर के आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि चमोली जिले में आग की 135 घटनाओं में 67.80 हेक्टेयर,टिहरी गढ़वाल में 45 घटनाओं में 42.9 हेक्टेयर,पौड़ी गढ़वाल में 42 में 58.5हेक्टेयर, रुद्रप्रयाग मे 39 घटनाओं में 26हेक्टेयर,पिथौरागढ़ में 37 में 31.25 और जनपद देहरादून में फारेस्ट फायर की 36 घटनाओं में 52.46 हेक्टेयर जंगल जल कर नष्ट हो गया है।
मई 2022 में फारेस्ट फायर की 1844घटनायें दर्ज हुई, जिनमे लगभग 2955 हेक्टेयर जंगल नष्ट हो गये थे
जून 2023 में फारेस्ट की 570 घटनाओं से 670 हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो गया था।
2024 में बिन्सर अभ्यारान्य के जंगलों में लगी आग में 4 वन कर्मियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और चार बुरी तरह जल गये थे जिनके उपचार को लेकर विभागीय मंत्री सुबोध उनियाल और अधिकारियों की संवेदनहिंता अख़बारों की सुर्खियों में छायी रही।
प्रदेश के जंगलों में आग न लगे इसके लिये मंत्री जी हर साल वन विभाग में अधिकारियों के साथ मैराथन बैठके करते है लेकिन हकीकत में धरातल पर जंगलों में आग की घटनायें थम नहीं रही है।
उत्तराखंड के जंगल दहक रहें हैं। लेकिन सुबोध उनियाल प्रदेश मे अस्पतालों के निरिक्षण में ज्यादा व्यस्त दिखायी दे रहे है।

सुबोध उनियाल 2022 से प्रदेश के वन मंत्री हैं।20 मार्च को प्रदेश में हुये मन्त्रीमण्डल विस्तार के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव कर डाले थे स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग डॉ धन सिंह रावत से हटा कर सुबोध उनियाल को दे दिया गया था।
देखा जा रहा है कि आवंटन के बाद से सुबोध उनियाल का सारा ध्यान नये विभाग पर ज्यादा केंद्रित है विगत दो माह से वह प्रदेश के अस्पताल व मेडिकल कालेज के औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते नजर आ रहे हैं ।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने के उपरांत
–23 मार्च को मंत्री जी दून मेडिकल कालेज पहुंचकर स्वास्थ्य सुविधाओं का निरक्षण करते हैं ।
–26 मार्च की शाम मंत्री जी औचक निरिक्षण के लिये डॉ धनसिंह रावत की विधानसभा क्षेत्र मे स्थित श्रीनगर मेडिकल कालेज पहुंच जाते है।
–28 मार्च को घनसाली स्थित सीएचसी नंदगांव का औचक निरिक्षण किया जाता है। फिर बसंत कौथिग महोत्सव मे शामिल होते है।
–30 मार्च को ऋषिकेश स्थित राजकीय चिकित्सालय का औचक निरुक्षण करने पहुंच जाते है।
–01 अप्रैल को देहरादून मे चिकित्सा शिक्षा विवि के कार्यक्रम मे शामिल होते हैं।
–02 अप्रैल को देहरादून स्थित कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरिक्षण.
–05 अप्रैल को राजकीय चिकित्सालय बौराड़ी (नई टिहरी )का औचक निरिक्षण.
–08 अप्रैल को उपजिला चिकिसालय नरेन्द्रनगर का औचक निरिक्षण.
–11 अप्रैल को प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के द्विवार्षिक अधिवेशन मे शामिल होते हैं.
–13 अप्रैल को डॉ धन सिंह रावत के कार्यकाल की योजना के फल स्वरूप्त तैयार जन सुविधाओं का देहरादून में लोकार्पण करते हैं.
–15 अप्रैल को राजकीय उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवप्रयाग का औचक निरिक्षण.
–02 मई को देहरादून में राजकीय चिकित्सा संकाय संघ के शपथ ग्रहण मे शामिल होते हैं
–03मई को सचिव के साथ चिकित्सा शिक्षा की समीक्षा बैठक करते हैं.
–07मई को उधमसिंह नजर स्थित जिला अस्पताल रुद्रपुर का निरिक्षण.
–08 मई को हल्द्वानी मेडिकल कालेज का निरिक्षण.
–09 मई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरमपानी नैनीताल व उपजिला चिकित्सालय सितारगंज एवं पीएचसी शक्तिफार्म का औचक निरिक्षण.
–12 मई नर्सिंग दिवस कार्यक्रम मे देहरादून मेडिकल कालेज में शामिल.
–14 मई को मुख्यमंत्री के साथ चिकित्साधिकारीयों व फरमासिस्ट को नियुक्ति पत्र बांटते हैं
–18 मई को हरिद्वार स्थित जिला महिला चिकित्सालय का औचक निरिक्षण
–22 मई को सी एच सी रायपुर व उप जिला चिकित्सालय प्रेमनगर देहरादून का निरिक्षण
–24 मई को फरासिस्ट की सम्मान कार्यक्रम मे शामिल होते हैं
(उक्त समस्त सूचना मंत्री जी के फेसबुक पेज से प्राप्त की गयी हैं)
20मई को देहरादून स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल पैनेसिया के आईसीयू में आग लगने की घटना घटित होती हैं जिसमे एक मरीज की मौत हो गयीं थी मंत्री जी व तत्कालीन गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय घटना स्थल का निरीक्षण करने व मरीजों का हाल चाल पूछने पहुंच जाते हैं। लेकिन फारेस्ट फायर से प्रभावित क्षेत्र में या पीड़ित परिवरों से मिलने का सुबोध को समय नही निकाल पाते है।
इसके बाद 26मई को वन विभाग में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंत्री जी सफाई देते हैं। कि बिना जन सहभागिता के वनाग्नि पर नियंत्रण नहीं हो सकता हैं और वह अब पिपल्स फ्रेंडली पॉलिसी बनाने की बात कर रहें हैं।
जब चुनाव नजदीक है तब मंत्री जी को पॉलिसी बनाने की याद आ रही है।ऐसे में प्रदेश की पीड़ित जनता का
मंत्री जी से सवाल है कि बीते पाँच वर्ष में आपने वन विभाग में काम क्या किया हैं फिर?
