क्या भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड को मिलेगा नया अध्यक्ष

भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड

कुलदीप सिंह राणा /देहरादून /10-06-2026

भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के चतुर्थ बोर्ड का कार्यकाल 02 फरवरी को समाप्त हो चुका है अभी तक परिषद के नये बोर्ड गठन को लेकर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है और न ही नियमानुसार शासन द्वारा परिषद में नियंत्रक की नियुक्ति की गयी है। चार माह बीत जाने के बाद भी परिषद के पांचवे बोर्ड गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सरकार द्वारा वर्ष 2022 में परिषद में अध्यक्ष नियुक्ति और चतुर्थ बोर्ड गठन को लेकर जिस प्रकार सयुंक्त प्रान्त (आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति )अधिनियम 1939 में दी गयीं व्यवस्थाओं को दरकिनार किया गया था,उसके बाद से नये बोर्ड गठन को लेकर प्रदेश की जनता के बीच से अनेक सवाल सामने आ रहें है।

परिषद के अधिनियम के भाग 2 की धारा 3 में स्पस्ट लिखा गया है कि “अध्यक्ष” का तात्पर्य बोर्ड के अध्यक्ष से है।और धारा 1 में लिखा हुआ है कि “बोर्ड” का तात्पर्य धारा 3 के अधिनियम संघटीय (आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति ) बोर्ड से है

अध्यक्ष व बोर्ड नियुक्ति को स्पस्ट करते हुये अधिनियम धारा 5(1) स्पस्ट किया है कि बोर्ड में अध्यक्ष सहित निम्नलिखित सदस्य होंगे

धारा 6(1) एक अध्यक्ष जों राज्य सरकार द्वारा नाम निर्देशित किया जायेगा।

धारा 6(2) पाँच सदस्य जों राज्य सरकार द्वारा नाम निर्देशित किये जायेंगे।

लेकिन तत्कालीन विभागीय मंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बिना बोर्ड गठित किये ही आधी अधूरी व्यवस्था के अंतर्गत मात्र अध्यक्ष पद पर डॉ जे एन नौटियाल की नियुक्ति कर दी गयी थी।


अब आयुर्वेद से जुड़े जानकारों को आशंका है कि कहीं सरकार पिछले अध्यक्ष डॉ जे एन नौटियाल को दुबारा रिपीट तो नहीं करने जा रही है।

कुछ पूछ रहें है कि क्या मुख्यमंत्री पिछले अध्यक्ष की कारगुजारियों से अनभिज्ञ है।


क्या परिषद के पांचवे बोर्ड का गठन सयुंक्त प्रान्त (आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति )अधिनियम 1939 में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार हो पायेगा या नहीं?


या फिर पूर्व की भांति सत्ता के संरक्षण किसी ऐसे व्यक्ति को बैठा दिया जायेगा जिसके लिये अधिनियम की व्यवस्थाओं को भी नजर अंदाज कर दिया जायेगा.


परिषद के चतुर्थ बोर्ड गठन और अध्यक्ष की नियुक्ति में तत्कालीन आयुष मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जिस प्रकार से अधिनियम को दरकिनार कर डॉ जे एन नौटियाल (जनानंद नौटियाल ) को नियुक्त किया था।


मुख्यमंत्री द्वारा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाये गये डॉ जे एन नौटियाल के ऊपर पहले से आयुष विभाग द्वारा वर्ष 2017 में आयुर्वेद में एमडी अध्ययन करने हेतु शासन को दिये शपथ पत्र में जानबूझकर अपने निजि स्वार्थ हेतु तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर शासन के कार्यालय आदेश में उल्लेखित शर्तो से इतर अनुबंध पत्र प्रस्तुत किये जाने के मामले में कार्यवाही गतिमान थी

कहा जा रहा है कि अध्यक्ष नियुक्त होते ही सत्ता का खुले संरक्षण मिलने पर डॉ नौटियाल द्वारा परिषद के कार्य में अपनी मनमानियों शुरू कर दी थी।

और परिषद के राजकोष को अपनी सुविधाओं के ऊपर नियम विरुद्ध तरिके से खर्च करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। खुद को दायित्वधारी राज्य मंत्री बता डॉ नौटियाल द्वारा दायित्वधारियों के संदर्भ में जारी मन्त्रीपरिषद द्वारा जारी आदेश का गलत उपयोग कर परिषद से लाखों रूपये वेतन भत्ते समवर्ती स्टॉफ व वाहन का लाभ उठाया जाता रहा।


जिस पर 27जुलाई 2023 को रोक लगाते हुये अपर सचिव आयुष द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि…..
भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष को अनुमन्य की जा रही सभी सुविधायें (मानदेय, समवर्ती स्टॉफ व वाहन पीओएल आदि) राज्य सरकार की अनुमति के बिना दी जा रही है जो कि न सिर्फ अधिनियम में दी गयीं व्यवस्था का उल्लंघन है अपितु वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में भी आता है। अतः भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा बिना शासकीय स्वीकृति के अध्यक्ष भारतीय चिकित्सा परिषद को अनुमन्य सभी सुविधाओं पर तत्काल प्रभाव समाप्त किया जाता है।


उक्त आदेश के बावजूद आयुष विभाग अधिकारी व रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाये कि डॉ नौटियाल को परिषद द्वारा पूर्व में किये गये नियम विरुद्ध भुगतान की वसूली कर सके।

कुछ महीनो बाद ही डॉ नौटियाल सूबे के मुख्यमंत्री कार्यालय से आयुष विभाग के अधिकारी को फोन करवा कर दबाव में अपने पक्ष में मानदेय वाहन व अन्य सुविधाओं को पुनः जारी किये जाने का आदेश जारी करवा लाये। जबकि गोपन (मन्त्रीपरिषद) अनुभाग द्वारा अपनी राय में स्पस्ट कहा गया कि परिषद उनके दायरे में नहीं है। जो पद गोपन के दायरे में नहीं है उस पर सुविधाओं से सबंधित गोपान का आदेश कैसे लागू हो सकता है?


चूँकि एक्ट में बोर्ड व अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित है और डॉ नौटियाल की नियुक्ति बिना बोर्ड के 23 मार्च 2022 को गयीं थी तो नियमनुसार मार्च 2025 को ही उनका कार्यकाल समाप्त हो जाना चाहिये था।
लेकिन जिसे सत्ता का संरक्षण प्राप्त हो उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है कुछ दिनों में वह पुनः अपनी नियुक्ति से संबंधित अग्रिम आदेश करवा लाते हैं।

अब 02फरवरी 2026 को परिषद के चतुर्थ बोर्ड का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।
हालांकि सुनने में आ रहा है कि डॉ नौटियाल जिन्होंने परिषद को अपनी निजि सम्पत्ति समझ लिया है यह मानने को तैयार नहीं है कि वह अब अध्यक्ष नहीं है और लगातार परिषद कार्यालय में कर्मचारियों को निर्देशित करने पहुंच रहें है और शासन में अपनी नियुक्ति को साबित करने की जुगत में चक्कर काटते देख जा रहें हैं।

यह भी पता चला है कि इस काम में वह अपनी पत्नी विमला नौटियाल जों कि उत्तरकाशी से भाजपा की नेत्री भी है के राजनितिक रसूख का भी उपयोग कर रहें है।
मार्च माह में हुये मंत्री मंडल विस्तार के बाद कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक प्रदेश के नये आयुष मंत्री बनाये गये है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मदन कौशिक क्या भारतीय चिकित्सा परिषद को कोई नया योग्य अध्यक्ष दे पायेयें या नहीं।
जों भी हो चुनावी साल में परिषद में होने वाले पंचम बोर्ड गठन पर सबकी निगाहेँ टिकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POSKOBET

POSKOBET

POSKOBET

POSKOBET

POSKOBET

SUNDA787

SUNDA787

SUNDA787

SUNDA787

SUNDA787

SUNDA787