Kuldeep Singh Rana /Dehradun /30-6-2026
उत्तराखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल दून हॉस्पिटल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख आधार माना जाता है। हर दिन हजारों मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहाँ पहुँचते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से अस्पताल में प्रबंधन से जुड़ी खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अव्यवस्थाओं पर सवाल खडे हो रहे हैं। अस्पताल की प्रबंधन व्यवस्था मरीजों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है
दून हॉस्पिटल में अव्यवस्थाओं को लेकर सबसे ज्यादा सवाल प्रिंसिपल गीता जैन की भूमिका पर उठते रहें हैं। लेकिन अस्पताल की खामियों के लिए क्या सिर्फ प्रिंसिपल को ही जिम्मेदार माना जा सकता है?

आपको बता दें कि किसी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में प्रिंसिपल संस्थान का प्रमुख होता है। उसकी भूमिका मुख्यतः मेडिकल शिक्षा, शोध, संस्थान के समग्र प्रशासन तथा नीतिगत निर्णयों से जुड़ी होती है। वहीं अस्पताल के दैनिक संचालन जैसे वार्ड प्रबंधन, मरीजों की सुविधाएँ, साफ-सफाई, इमरजेंसी सेवाओं का समन्वय, कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था और अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी मेडिकल सुपरिटेंडेंट की होती है।
दून हॉस्पिटल में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाएँ
दून हॉस्पिटल में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाएँ अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। इमरजेंसी में अव्यवस्था, मरीजों की परेशानियाँ, सुरक्षा संबंधी घटनाएँ और अस्पताल प्रबंधन पर उठते सवाल यह संकेत देते हैं कि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। इसलिए यदि कमियां अस्पताल प्रबंधन से जुड़ी है, तो मेडिकल सुपरिटेंडेंट की भूमिका और जवाबदेही की भी समीक्षा की जानी चाहिये।
दून हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर नियुक्त है डॉ रविन्द्र सिंह बिष्ट
वर्तमान में डॉ रविन्द्र बिष्ट दून हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद पर नियुक्त है। देहरादून लाये जाने से पूर्व डॉ बिष्ट श्रीनगर मेडिकल कालेज में इएनटी विभाग में प्रोफेसर नियुक्त थे। डॉ बिष्ट पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत के खासमखास में माने जाते है। यह भी माना जाता है कि मंत्री जी ने पहले आपको मानको के उलट चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में अपर निदेशक नियुक्त किया फिर कुछ महीनों बाद आपका दून मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर कर दिया। कहा जाता है कि इसके लिये ईएनटी विभाग में भी प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किये गये। दून मेडिकल कॉलेज के इएनटी विभाग में प्रोफेसर के दो पद है। इसके बावजूद विभागध्यक्ष प्रोफेसर भावना पंत को अल्मोड़ा ट्रांसफर कर दिया गया ताकि डॉ बिष्ट को विभागाध्यक्ष भी बनाया जा सके,फिर कुछ महीनों बाद ही आपको मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की कुर्सी पर भी बैठा दिया गया।

डॉ रविन्द्र सिंह बिष्ट के पास हैं एक साथ कई प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां
दून हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी है कि वर्तमान मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविन्द्र सिंह बिष्ट के पास एक साथ कई प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे अपर निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, दून हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट तथा ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं।

मेडिकल सुपरिटेंडेंट का पद पूर्णकालिक जिम्मेदारी वाला माना जाता है
यदि कोई अधिकारी एक साथ इतने महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहा हो, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या वह प्रत्येक पद को अपेक्षित समय और ध्यान दे पा रहा होगा। मेडिकल सुपरिटेंडेंट का पद अपने आप में पूर्णकालिक जिम्मेदारी वाला माना जाता है। अस्पताल के दैनिक संचालन, मरीजों की शिकायतों के निस्तारण, वार्ड प्रबंधन, साफ-सफाई, आपातकालीन सेवाओं की निगरानी और प्रशासनिक समन्वय जैसे कार्य निरंतर निगरानी और निर्णय लेने की मांग करते हैं।
इसी प्रकार, विभागाध्यक्ष के रूप में शिक्षण कार्य, ओपीडी में मरीजों का उपचार और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में अपर निदेशक के रूप में प्रदेश स्तर की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या एक ही अधिकारी इन सभी दायित्वों के साथ दून हॉस्पिटल के प्रशासन को पर्याप्त समय दे पा रहा है।
