उत्तराखंड आये भारत के 16वें वित्त आयोग की बैठक सचिवालय में गतिमान

कुलदीप राणा/देहरादून :देश का 16 वाँ वित्त आयोग इन दिनों तीन दिवसीय भ्रमण पर उत्तराखंड आया हुआ है, वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविन्द पनगढ़िया के नेतृत्व में आये दल में आयोग तीन सदस्य एनी जार्ज मेथ्यु, मनोज पांडा,सौम्या कांति घोष के अलावा आयोग के सचिव ऋत्विक पाण्डेय,सयुंक्त सचिव के के मिश्रा,सयुंक्त निदेशक पी अमरुथावर्षिनी शामिल है, वित्त आयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित आयोग है जो केंद्र सरकार और राज्य सरकार के मध्य वित्तीय संबंधों को परिभाषित करता है भारत में पहला वित्त आयोग 1951 में “वित्त आयोग अधिनियम 1951” के तहत स्थापित किया गया था। वर्ष 1950 मेंसंविधान लागू होने के बाद से अब तक देश में 15 वित्त आयोग गठित किया जा चुके हैं। 16वाँ वित्त आयोग इन दिनों भारत की विभिन्न राज्यों की भ्रमण पर है संविधान के अनुसार वित्त आयोग प्रत्येक 5 साल में नियुक्त किया जाता है इसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं वर्तमान में गतिमान 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर 2023 को किया गया था इसकी अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया कर रहे हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अक्सर राजकोषीय असंतुलन होता रहता है अनेक बार यह अपने राजस्व स्रोतों से अधिक उपयोग अथवा खर्च करने से होता है केंद्र और राज्यों के बीच राजकोषीय अंतर को बांटने के लिए कई प्रावधान पहले से ही भारत के संविधान में निहित है वित्त आयोग उन्हें प्रावधानों में से एक है जो केंद्र एवं राज्य के हस्तांतरण को संस्थागत सुविधाजनक बनाने के लिए संस्थागत ढांचे के रूप में कार्य करता है भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 आयु के कार्यक्षेत्र को प्रभावित करता है परिभाषित करता है।
16वें वित्त आयोग का यह दल आज सोमवार 19 मई की सुबह से सचिवालय में उपस्थित है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य के अधिकारियों के साथ वित्तीय बटवारे से सबंधित विषयों पर अति महत्वपूर्ण बैठक कर रहा है।

16 वित्त आयोग की टीम का यह  उत्तराखंड दौरा काफी अहम माना जा रहा है बैठक के बाद आयोग की संस्तुतियों पर ही निर्भर करेगा कि उत्तराखंड को केंद्र से कितनी सहायता किस रूप में मिलेगी

 राज्य को निम्न बिंदुओं पर है आयोग से उम्मीद

 1-ग्रीन बोनस

 2-राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना

 3-राजस्व घाटा अनुदान 

 4-केंद्रीय करूं में राज्य की हिस्सेदारी 

 5-राज्य को विशेष सहायता 

 6- केंद्रीय पोषित योजनाएं 

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